July 6, 2022

गुरुघासीदास ज्ञान स्थल पुष्प वाटिका सारंगढ में सतनामी समाज ने संविधान दिवस मना कर संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर जी को नमन किया

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सारंगढ :- हर भारतीय नागरिक के लिए हर साल 26 नवंबर का दिन बेहद खास होता है। दरअसल यही वह दिन है जब देश की संविधान सभा ने मौजूदा संविधान को विधिवत रूप से अपनाया था। यह संविधान ही है जो हमें एक आजाद देश का आजाद नागरिक की भावना का एहसास कराता है। जहां संविधान के दिए मौलिक अधिकार हमारी ढाल बनकर हमें हमारा हक दिलाते हैं, वहीं इसमें दिए मौलिक कर्तव्य में हमें हमारी जिम्मेदारियां भी याद दिलाते हैं। हर वर्ष 26 नवंबर का दिन देश में संविधान दिवस के तौर पर मनाया जाता है। 26 नवंबर को राष्ट्रीय कानून दिवस के रूप में भी जाना जाता है। आजादी के बाद भारत को एक मजबूत राष्ट्र बनाने एवं भारत की विविधता को एक सूत्र में पिरोकर रखने के लिए एक मजबूत आधार की जरूरत थी, जिसे बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी ने पूरा किया। संवैधानिक मूल्यों के प्रति नागरिकों में सम्मान की भावना को बढ़ावा देने के लिए यह दिवस मनाया जाता है।

सतनामी समाज सारंगढ ने गुरुघासीदास ज्ञान स्थल पुष्प वाटिका सारंगढ में संविधान दिवस मनाया साथ ही संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के छाया चित्र एवं संविधान के पुस्तक पर पुष्प अर्पित कर संविधान दिवस एवं बाबा साहब अमर रहे के नारे लगे इस मौके पर युवाओं ने संविधान के महत्व और नागरिकों को प्राप्त मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों के विषय मे चर्चा किया भारत के लोकतंत्र में संविधान देश की आत्मा हैं उक्त बातें आयोजन में सम्मिलित रितेश अजगल्ले ने कहा कार्यक्रम में सम्मेलाल कुर्रे, नंदू सुमन,रमेश कोशले, कृष्णा अजगल्ले,कुंदन कुर्रे, जितेंद्र पुराईन,शैल अजगल्ले,रितेश अजगल्ले,दिनेश बंजारे,हितेश अजगल्ले, ओमकार मल्होत्रा,योगेश सोनवानी, ईराक टांडे एवं अन्य उपस्थित रहे।

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